शास्त्रों के अनुसार 12 अगस्त 2020 को ही मनाएं जन्माष्टमी व्रत

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*आचार्य विष्णु*

 सप्तमी युक्त अष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाना नही चाहिए।

 

 

*ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार*

 

*"वर्जनीया प्रयत्नेन*

*सप्तमीसंयुताष्टमी"*

अर्थात सप्तमी से संयुक्त अष्टमी का प्रयत्न पूर्वक त्याग कर देना चाहिये ।

 

*कलाकाष्ठामुहूर्तापि यदा कृष्ण अष्टमी तिथि:।* *नवम्यां चैव ग्राह्या स्यात् सप्तमी संयुता नहि।।*

 

*वैष्णववास्तु "अर्द्धरात्रिव्यापिनिमपी रोहिणीयुतामपि सप्तमीविद्धान परित्यज्य नवमीयुतैव ग्राह्या, इति नृसिंह परिचर्याद्यनुयायिन:*

 

अग्नि पुराण में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के संबंध में लिखा गया है...

 

*वर्जनीय प्रयत्नेन सप्तमी संयुता अष्टमी।*

*बिना ऋक्षेण कर्तव्या नवमी संयुता अष्टमी।*

 

अर्थात जिस दिन सूर्योदय में सप्तमी बेधित अष्टमी हो और रोहिणी नक्षत्र हो तो उस दिन व्रत नहीं रखना चाहिए। नवमी युक्त अष्टमी को ही व्रत रखना चाहिए।

 

*पद्म पुराण के अनुसार*

 

*पुत्रां हन्ति पशून हन्ति, हन्ति राष्ट्रम सराजकम।*

*हन्ति जातान जातानश्च, सप्तमी षित अष्टमी।*

 

अर्थात अष्टमी यदि सप्तमी विद्धा हो और उसमें उपवास करते हैं तो पुत्र, पशु, राज्य, राष्ट्र, जात, अजात, सबको नष्ट कर देती है।

 

*आचार्य विष्णु महाराज*

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